*तेजपात*
*परिचय :तेजपात का पेड़ हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में पाया जाता है। यह सिक्किम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी पैदा होता है। तेजपात सदा हरा रहने वाला पेड़ है। तेजपात का मसालों में प्रयोग किया जाता है। तेजपात का रंग हरा तथा ऊपरी भाग चिकना होता है। इस पर तीन स्पष्ट शिराएं दिखाई पड़ती है। इसमें लौंग तथा दालचीनी की तरह की खुश्बू होती है। तेजपात को धूप में सुखाकर प्रयोग में लिया जाता है।*
*विभिन्न भाषाओं में नाम : हिंदी तेजपात, तेजपता।संस्कृत तमालपत्र।गुजराती लमालपत्र।मराठी तमालपत्र।बंगाली तेजपात।पंजाबी तमालपत्र।तैलगु दिरसेनामु।अरबी साजजेफारसी सादरस्अंग्रेजी इंडियन चाईनामोन*
*तुलना : बालछड़ से तेजपात की तुलना की जा सकती है।*
*दोषों को दूर करने वाला : मस्तगी और बिही का शर्बत तेजपत्ते के दोषों को दूर करता है।*
*गुण-धर्म : तेजपत्ता हल्का, तीखा व मीठा होता है। इसकी प्रकृति गर्म होती है। यह वातानुलोमक, मस्तिष्क (दिमाग) को शक्ति देने वाला, पेशाब को साफ करने वाला तथा आमाशय को शक्ति देने वाला होता है। तेजपत्ता में दर्दनाशक तथा एंटी-ऑक्सीडेंड गुण पाए जाते हैं।*
*विभिन्न रोगों में उपयोगी :*
*1. सर्दी-जुकाम :चाय पत्ती की जगह (स्थान) तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से छीकें आना, न
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